‘चिंता की बात नहीं, मैं आपके साथ हूं’, TMC और उद्धव सेना के बागी सांसदों संग ब्रेकफास्ट मीटिंग, बोले- नए सांसदों को बोलने का मौका मिलना चाहिए

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान जारी हंगामे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए के नए सांसदों के साथ अपने आवास पर ब्रेकफास्ट बैठक की। इस दौरान उन्होंने सांसदों से संसदीय बहसों में सक्रिय भागीदारी करने, संसद की परंपराओं को समझने और अपने-अपने क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने संसद को लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर बताते हुए कहा कि लगातार हो रहे व्यवधानों के कारण नए सांसदों को सदन में अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, जो उनके साथ न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने संसदीय कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने पर जोर दिया।
संसद के इतिहास से सीखने की सलाह
प्रधानमंत्री ने सांसदों से संसद के इतिहास और अभिलेखों का अध्ययन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सदन में उपलब्ध ऐतिहासिक सामग्री बहस की तैयारी में काफी मददगार हो सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्यों का विकास ही देश की प्रगति का आधार है और सभी सांसद अपने-अपने क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दें।
बैठक में करीब 45 सांसद शामिल हुए, जिनमें शिवसेना, एनसीपी (अजित पवार गुट) और अन्य सहयोगी दलों के सांसद भी मौजूद थे।
NDA परिवार है, चिंता की जरूरत नहीं
प्रधानमंत्री ने हाल ही में एनडीए में शामिल सांसदों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि “एनडीए एक परिवार है। हर सहयोगी दल और हर सांसद का सम्मान किया जाएगा। मैं एनडीए के हर सांसद के साथ खड़ा हूं, किसी को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है।”
उन्होंने सांसदों से कहा कि अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति दें और किसी भी महत्वपूर्ण परियोजना के लिए सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क करने में संकोच न करें। साथ ही किसानों, मजदूरों और आम लोगों से नियमित संवाद बनाए रखने की भी सलाह दी।
सांसदों से व्यक्तिगत मुलाकात
बैठक के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनका हालचाल जाना। उन्होंने सांसदों को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ भी सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने और दिल्ली के राजनीतिक नैरेटिव में उलझने से बचने की सलाह दी।
यह बैठक एक दिन पहले भाजपा सांसदों के साथ हुई डिनर मीटिंग के बाद आयोजित की गई और इसे मानसून सत्र के दौरान सांसदों के साथ प्रधानमंत्री के संवाद अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
